संत कबीर दर्शन-जैसे पदार्थ भक्षण करते हैं वैसे ही विचार हो जाते हैं

शब्दलेख सारथी जैसा भोजन खाइये, तैसा ही मन होयजैसा पानी पीजिये, तैसी वाणी होयसंत शिरोमणि कबीरदास कहते हैं कि जैसा भोजन करोगे, वैसा ही मन का निर्माण होगा और जैसा जल पियोगे वैसी ही वाणी होगी अर्थात शुद्ध-सात्विक आहार तथा पवित्र जल से मन और वाणी पवित्र होते हैं इसी प्रकार... [पूरी पोस्ट]
writer दीपक भारतदीप

हिन्दू-धर्म

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[25 Apr 2010 22:47 PM]

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