दाँत नहीं पर नोचे बोटी ~~

यूरेका लगता है फिट हो गई गोटी, वाह भई वाह सांझ ढले अंगूर की बेटी, वाह भई वाह . मुर्ग मुसल्लम की दावत खाने दौड़े आये दाँत नहीं पर नोचे बोटी, वाह भई वाह . पानी-पानी चिल्लाते हो प्यासे अधरों से देखो खुला छोड़ दिया टोटी, वाह भई वाह . कल दिखे गुलछर्रे उड़ाते कनाट प्लेस... [पूरी पोस्ट]
writer M VERMA
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[25 Apr 2010 21:06 PM]

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