दिखावे की दुनिया..

उडन तश्तरी  .... अर्थी उठी तो काँधे कम थे, मिले न साथ निभाने लोग बनी मज़ार, भीड़ को देखा, आ गये फूल चढ़ाने लोग... दुनिया दिखावे की हो चली है. कोई भी कार्य जिसमें नाम न मिले, लोग न जाने- कोई करना ही नहीं चाहता. दिखावा न हो तो बस फिर मैं!! जिस भी कार्य में मेरा फायदा हो, वो... [पूरी पोस्ट]
writer Udan Tashtari
views
215
upvote
11
downvote
0
rating
11
comments
25
[25 Apr 2010 21:00 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix