दिखावे की दुनिया..
अर्थी उठी तो काँधे कम थे, मिले न साथ निभाने लोग बनी मज़ार, भीड़ को देखा, आ गये फूल चढ़ाने लोग... दुनिया दिखावे की हो चली है. कोई भी कार्य जिसमें नाम न मिले, लोग न जाने- कोई करना ही नहीं चाहता. दिखावा न हो तो बस फिर मैं!! जिस भी कार्य में मेरा फायदा हो, वो...
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Udan Tashtari
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[25 Apr 2010 21:00 PM]



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