अंतरचेतना

स्वार्थ तुम नहीं जानतीं, इन मूल्यों की कोई कीमत नहीं है आज, नैतिकता के सवाल बेमानी हैं अब| ये जो तुम्हारी प्रेरणा है ना, अच्छा बनने की, सच्चा बनने की, ये सब तो अयोग्यताएं है आज के दौर में| तुम मुझे भोंदू बनाना चाहती हो? यदि मैं तुम्हारे द्वारा बताये सब... [पूरी पोस्ट]
writer swaarth

poetryconscience

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[25 Apr 2010 19:52 PM]

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