वर्धा में हमने जो देखा वह अद्‌भुत है…

satyarthmitra   रेलगाड़ी के ठण्डे कूपे से निकलकर बैशाख की चिलचिलाती धूप में जब हम सेवाग्राम स्टेशन पर उतरे तो पल भर में माथे पर पसीना आ गया। पत्थरों और कंक्रीट की इमारतों के बीच हरियाली बहुत विरल थी। तराई क्षेत्र का रहने वाला हूँ इसलिए यह इलाका कुछ ज्यादा ही उजाड़... [पूरी पोस्ट]
writer सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी

विभूति नारायण राय

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[25 Apr 2010 19:20 PM]

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