आज दिल को मेरे, फिर वही प्यास है

9th Dimension's Base  आज दिल को मेरे, फिर वही प्यास हैजिसके लिए बरसों से ये मन उदास हैअब इस सोंच की प्रत्यंचा खिंच जाना है  बाणों को, धनुष सीमा से निकल जाना है जब सोंच को, इरादों की शक्ल लेनी थीआगे बढ़ा के कदम, धूलि रौंद देनी थी  तब रुख, हवाएं भी अपना बदलने... [पूरी पोस्ट]
writer Vishal Kashyap
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[25 Apr 2010 18:14 PM]

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