कहीं किसी सड़क पर...........

साहित्य योग दिन प्रतिदिन की भीड़ में कहीं किसी सड़क परचिलचिलाती धूप में नगें पैर दौड़ती इधर-उधर.....कभी हिस्से में मिलती नई तो कभी डामर से लतफत सड़क देखती एक टक चलते लोगों को तलाशती कोई अपना इन बदलते लगों में चलती सड़क परदुःख ने छोड़ा ना... [पूरी पोस्ट]
writer Tej Pratap Singh
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[25 Apr 2010 15:46 PM]

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