पढ़ना और समझना
जब मैं कुछ पढ़ता हूँ और उससे अर्थ ग्रहण करता हूँ और जब आप कुछ पढ़ते हैंऔर उसका अर्थ ग्रहण करते हैंयह जरूरी नहीं कि हमने जो पढ़ा और उसका जो अर्थ ग्रहण किया वह वही है जो कि लेखक का रहा होगा नहीं, बहुत कम संभावनाएँ हैं कि कोई लेखक अपना...
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Manoj Bharti
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[25 Apr 2010 13:39 PM]



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