कायर(कहानी)
एक आज समाजशास्त्र की किताब पढ़ते हुए ,मेरा शारीर तो वही रह गया और मन पंख लगा कर उड़ गया, जरुरी पंक्तिया रेकंकित करते हुए न जाने कब किताब के आखिरी पन्ने पर तुम्हे उकेरने लगा,मुझे हमेशा ऐसा लगता है, तुम्हे मेरे से अच्छा कोई भी तस्वीर में नहीं उतार...
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Sonal Rastogi
रिश्ते
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[25 Apr 2010 12:43 PM]



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