'कश्ती..'
..."खंज़र घोंप दो..सीने में आज..जलता हूँ..ऐसे भी..यादों के समंदर..जज़्बातों की कश्ती में..मेरे महबूब..!!"......
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Priyankaabhilaashi
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[25 Apr 2010 12:17 PM]



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