यूँ प्यार को आज़माना नहीं था
कल रात एक मित्र से मेरे ग़ज़ल के सफ़र की चर्चा हो रही थी , चर्चा के दौरान शुरूवाती दौर में कही गई गजलों का जिक्र आया बस मन हुआ कि एक पुरानी ग़ज़ल पोस्ट की जाए दूरी को अपनी बढ़ाना नहीं थायूँ प्यार को आज़माना नहीं थाउसने न टोका न दामन ही थामा रुकने का कोई...
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श्रद्धा जैन
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[25 Apr 2010 12:34 PM]



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