निर्मल और मैं....

मौन में बात.. निर्मल- क्या भाई अकेले-अकेले ही चाय पी लोगे... एक मेरे लिए भी बना दो?मैं- वाह! बड़े दिनों बाद... बैठिये मैं चाय चढ़ाता हूँ।निर्मल- तुम जगह ही नही दे रहे हो? ना तो आने की और ना अभी बैठने की?मैं- यहाँ बैठिये... आईये।निर्मल- कितने टुकड़े हैं..? और कितने... [पूरी पोस्ट]
writer मानव

अपने से...

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[25 Apr 2010 12:33 PM]

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