कुछ अधूरे पन्ने
1: चैन से सोते थे हम,जब घर में दरवाज़ा ना था |जब से पहरेदार रखे,नींद भी आती नहीं |2: देख कर उनको कदम ,रुकने लगें क्या बात है |सोचने को हैं विवश,क्या यार तुममे खास है...
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Tapashwani Anand
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[25 Apr 2010 11:50 AM]



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