घरौंदा

गीत............... गम की तपिश होया सोचों का बवंडर होशोला हो मन काया आंखों का समंदर हो ,डूब जाता है जैसे सबजब तैरना भी आता होमंझदार नही मिलतीकिनारे पर चला आता हो ।डूबना भी क्या डूबनाजो गहरे पानी में डूबा होडूबो तो वहां जा करजहाँ पानी का निशां न हो ।ये सोचता है मन मेरा किहर... [पूरी पोस्ट]
writer sangeeta swarup
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[25 Apr 2010 08:48 AM]

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