अयोध्या को प्रस्थान - युद्धकाण्ड (25)

संक्षिप्त वाल्मीकि रामायण एक रात्रि विश्राम करने के पश्‍चात् श्री रामचन्द्र जी ने विभीषण को बुलाकर कहा, "हे लंकेश! मेरा वनवास का समय पूरा होने को है। अब मेरा मन भरत से मिलने के लिये उद्विग्न हो रहा है। वे मुझे स्मरण करके दुःखी हो रहे होंगे। इस लिये तुम ऐसा प्रबन्ध करो कि हम... [पूरी पोस्ट]
writer जी.के. अवधिया
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[25 Apr 2010 08:49 AM]

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