साथ में सिर्फ अपने हैं ग़म दोस्तो.

डॉ.सुभाष भदौरिया.अहमदाबाद. ग़ज़ल धूप में जल रहे हैं कदम दोस्तो.साथ में सिर्फ हैं अपने ग़म दोस्तों.याद फिर उसकी आयी हमें देर तक,आँख फिर होगयी अपनी नम दोस्तो.मोम के वे नहीं जो पिघल जायेंगे,अपने पत्थर के हैं इक सनम दोस्तो.साथ में आज कल वो कहाँ हैं मेरे,साथ खाई थी जिसने कसम... [पूरी पोस्ट]
writer डॉ.सुभाष भदौरिया.
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[25 Apr 2010 06:17 AM]

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