ना ही कोई हिन्दू देवी -देवता गलत हो सकता है और ना ही पैगम्बर मुहम्मद साहेब गलत हो सकते है और ना ही ईसा मशीह
आदमी वही अच्छा होता है जिसके अन्दर इंसानियत होती है। धर्म वो ही अच्छा होता है जिसके अन्दर समाज को जोड़ने की कला होती है। सिर्फ धार्मिक बनने या वेद कुरान का नारा लगाने वाला इन्सान कभी भी समाज के बारे मैं नहीं सोचेगा। वो तो सिर्फ अपने धर्म के बारे मैं ही...
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Tarkeshwar Giri
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[25 Apr 2010 04:12 AM]



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