असमाप्त कविता के नये शुरुआती ड्राफ़्ट्स

UDAY PRAKASH (तीन)लुटियन के टीले से कभी नहीं दिखती अरुंधतिवहां अक्सर दिखता है पृथ्वी के निकट आता हुआअमंगलकारी रक्ताभ मंगलया अंतरिक्ष में अपनी कक्षा से भटका कोई गिरता हुआ टोही खुफि़या उपग्रहरोहतक या मथुरा से देखो तो सूर्योदय के ठीक पहलेराजधानी के ऊपर हर रोज़ उगता है... [पूरी पोस्ट]
writer Uday Prakash

कविता

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[25 Apr 2010 03:42 AM]

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