A poetess blog
ऑफिस केवातानुकूलित कमरे में बैठ करखिडकियों के काले शीशों के बाहरदिखाई देते लोगपेड़, मकान, सड़क, मौसमदिखते है कितने सुन्दरलेकिन बिजली के चले जाने केकुछ पलों बाद हीमहसूस होने लगती हैदूर से दिखाई देतीसुन्दरता का सचपसीने से भीगते शरीरतपती हुई छतेंपिघलती...
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ranjana
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[25 Apr 2010 03:58 AM]



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