" ये हिंदू है ! ये है मुस्लिम ! " " रास्ते अपने तू चल… ! "
अंतर्जाल पर कुछ लोगों द्वारा फैलाये जा रहे वैमनस्य की तर्जुमानी नहीं ,इस पोस्ट की रचनाओं के शीर्षक हैं ये ! धार्मिक सहिष्णुता और महान् भारत की सनातन संस्कृति एवं सौहार्द की परंपरा के निर्वहन के संस्कारों से वंचित अनभिज्ञ जन को परमात्मा स द् बु द्धि...
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Rajendra Swarnkar
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[25 Apr 2010 03:03 AM]



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