GHAZAL
छोड़ कर हम अना और हनक जाएँगेतेरे कूचे से पर बेधड़क जाएँगेक्या करें देख कर सब चटक जाएँगेदीदा ए कू ए जाँ में खटक जाएँगे जां निसारी मिरी चर्ख है इब्तिदामेरे आहबाब भी ता-फलक जाएँगेदिल ए मजरूह में तेरी यादों की मयदिल छलक जाएगा हम छलक जाएँगेशीश महलों में जो...
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'शफक़'
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[25 Apr 2010 01:38 AM]



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