GHAZAL

फुरसत के रातदिन छोड़ कर हम अना और हनक जाएँगेतेरे कूचे से पर बेधड़क जाएँगेक्या करें देख कर सब चटक जाएँगेदीदा ए कू ए जाँ में खटक जाएँगे जां निसारी मिरी चर्ख है इब्तिदामेरे आहबाब भी ता-फलक जाएँगेदिल ए मजरूह में तेरी यादों की मयदिल छलक जाएगा हम छलक जाएँगेशीश महलों में जो... [पूरी पोस्ट]
writer 'शफक़'
views
15
upvote
2
downvote
0
rating
2
comments
3
[25 Apr 2010 01:38 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix