श्री राधा जी का दिव्य प्रेम ( सच्चे प्रेम की परिभाषा )
हम वैसे इस योग्य तो नहीं कि राधा जी के विरह को समझ सके । वो तो शाश्वत परात्पर ब्रह्म क़ी ही चैतन्य शक्ति हैं । पर हम तो ईश्वर के बेटे हैं । इसीलिए बेटे को पिता के बारे में कहने के लिए कोई कागज़ी स्वीकृति कि आवशयकता नहीं होती ।ईश्वर प्रेम या अपने सच्चे...
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Virender Rawal
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[25 Apr 2010 02:00 AM]



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