अब बेटियां बोझ नहीं!

chhammakchhallo kahis छछम्मक्छल्लो को अभी तक याद है, वह उनकी दूसरी बेटी थी, जिसके जनम के समय वह वहां थी. पहली संतान भी बेटी थी. अभी भी कई घरों में दो बेटियां स्वीकार कर ली जाती थीं. वहां भी स्वीकार ली गईं कि साल भर बाद फिर से उनके मां बनने की खबर आई. समझ में आ गया कि इस तीसरी... [पूरी पोस्ट]
writer Vibha Rani

बेटियाँ

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[25 Apr 2010 01:42 AM]

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