कल के अन्जाने...

Desires कल के अन्जाने, आज अपने से लगने लगे...कल तक नाम नहीं जानते थे एक-दूसरे काआज देखो तोनज़रें भी पहचानने लगे...कल तक ये सुर्ख हवाएँअन्जानी थीं मुझसे,आज ये मौसम भी अपना सा लगता है...कल तक डरता था दिल यहाँ आने से...आज,यहीं ठहर जाने को मन करता है...... [पूरी पोस्ट]
writer POOJA...

हिंदी

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[10 Apr 2010 02:44 AM]

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