भाँग, भैया, भाटिन, भाभियाँ, गाजर घास ... तीन जोड़ी लबालब आँखें - 6

एक आलसी का चिठ्ठा पहला भागदूसरा भागतीसरा भाग चौथा भाग  पाँचवा भाग आज होली है। हुड़दंग की प्रतीक्षा...। नौ बज चुके हैं और अचानक सन्नाटे को अनुभव करने लगता हूँ। बच्चे तो खेलने में लगे हुए हैं लेकिन बड़े ? क्या यह होली भी... ? दिन साफ है लेकिन मन के... [पूरी पोस्ट]
writer गिरिजेश राव

भौजी

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[24 Apr 2010 23:30 PM]

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