पशु का तन जीता
असमंजस में ही वक्त गँवायायुग बीते कुछ ना लिख पायामन की कल्पना शक्ति ने जब भी कोई ख्बाव बुनाउलझनों से टकरा कर हरदमउसने अपना सिर धुनाकवि के भावुक मन से हायपशु का तन जीताभावों के इस तट पर रहामेरा गागर रीताअसमंजस में ही वक्त गवाँयायुग बीते कुछ ना लिख पायाकई...
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डॉ. राजेश नीरव
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[24 Apr 2010 23:08 PM]



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