घाव से भरा पत्र.........................
दर्द और यादों का समेटा हैहर पल का लुटता सवेरा हैघाव से भरा पत्र.... जो उसने आज माँ को भेजा हैनिकालो मुझे इस अन्धकार से बाहर की सवेरा भी अब मुंह छिपाने लगा हैमैं और जिन्दा रह नहीं सकती बिना वजह आसुओं के घूँट पी नहीं सकती.....बाबा को...
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Tej Pratap Singh
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[24 Apr 2010 17:09 PM]



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