एक ग़ज़ल
वैसे तो ग़ज़ल मे लिखता नहीं.. और ना ही मेरी इतनी औकात है.. पर फिर भी कुछ कचोटा सा मन आज किसी बात से, तो बस एक कोशिश भर कर दी... देखें कितना सफल हुआ हूँ.... तेरे अहद-ए-तरब ने कुछ इस ढब अश्क बार किया,मेरी खरोश से तो दहर भर ने भी अश्क बार...
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हिमांशु पन्त
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[24 Apr 2010 16:06 PM]



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