मुझको भी तो भ्रष्ट बना दो!

मीठी मिर्ची प्रभु! जाने किस घड़ी में मैने तुझसे विद्या का वरदान माँग लिया था। जब माँगा था तो यह सोचकर माँगा था कि यही दुनिया का श्रेष्ठ वरदान है, अब बहुत पछता रहा हूँ। संभव हो तो प्रायश्चित का मौका दो और विद्या, ज्ञान, लेखनी वगैरह अपने माल गोदाम में जमा करवा लो। अपनी... [पूरी पोस्ट]
writer ओम द्विवेदी
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[24 Apr 2010 16:02 PM]

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