गीतिका: कद छोटा परछाईं बड़ी है... ---आचार्य संजीव 'सलिल'
गीतिकासंजीव 'सलिल'कद छोटा परछाईं बड़ी है.कैसी मुश्किल आई घड़ी है.चोर कर रहे पहरेदारीसच में सच रुसवाई बड़ी है..बीवी बैठी कोष सम्हालेखाली हाथों माई खड़ी है..खुद पर खर्च रहे हैं लाखोंभिक्षुक हेतु न पाई पडी है..'सलिल' सांस-सरहद पर चुप्पीमौत शीश पर आई-अड़ी...
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आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'
samyik hindi kavita
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[06 Apr 2010 14:33 PM]



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