दोहे आँख के... संजीव 'सलिल'

जनोक्ति  ब्लॉग दोहे आँख के...संजीव 'सलिल'कही कहानी आँख की, मिला आँख से आँख.आँख दिखाकर आँख को, बढ़ी आँख की साख..आँख-आँख में डूबकर, बसी आँख में मौन.आँख-आँख से लड़ पड़ी, कहो जयी है कौन?आँख फूटती तो नहीं, आँख कर सके बात.तारा बन जा आँख का, 'सलिल' मिली सौगात..कौन किरकिरी आँख... [पूरी पोस्ट]
writer आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'

samyik hindi kavita

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[21 Apr 2010 13:49 PM]

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