चमन में अमन है-हिन्दी व्यंग्य कविता
दहशतगर्द घूम रहे आजाद उनकी गोलियों से सभी तो नहीं मर गये फिर भी जिंदा हैं ढेर सारे लोग इसलिये मान लो चमन में अमन है। खेल के नाम पर चल रहा जुआ जिनकी मर्जी है वही तो खेल रहे हैं बाकी लोग तो बैठे हैं चैन से इसलिये मान लो चमन में अमन है। [...]...
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दीपक भारतदीप
अभिव्यक्तिअनुभूतिdeepak bharatdeepepatrika
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[24 Apr 2010 08:22 AM]



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