सरगम के समंदर में बहती मिठास
सरगम...इन चार अक्षरों में समाया है वैसा ही जादू, जैसा ढाई अक्षर वाले प्यार की नस-नस में बहता है। प्यार करो या संगीत सुनो...एक ही बात है...और संगीत से प्यार हो जाए, तब? फिर तो मज़ा ही कुछ और आता है। साज़ जगे और जाग गई ज़िंदगी...रग-रग में लहू बनकर तैरने...
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चण्डीदत्त शुक्ल
म्यूज़िकल बैंड
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[24 Apr 2010 07:16 AM]



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