कल और आज !

hindigen छत कि मुंडेर पर बैठीनीचे लगे वृक्षों को  देखकर ठंडक काअहसास ले रही थी.फिर नजर पड़ी शाखों के बीच घोंसले में बैठेपक्षियों के नवजात शिशु बंद आँखों से माँ की बाट जोह रहे थे.कब आएगी औ'कब डालेगी दाना मुंह मेंफिर अपने पंखों तलेछिपा कर... [पूरी पोस्ट]
writer रेखा श्रीवास्तव

ज़िन्दगी

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[24 Apr 2010 07:00 AM]

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