आसमान में हिस्सेदारी की कवायद (मरते आदिवासी)*(मनोज कुमार 'तपस')
विकास की अंधी दौड़ के कारण हज़ारों आदिवासी बदहाली के शिकार होते जा रहे हैं.हालात यह है कि आदिवासियों के पास मूलभूत सुविधायें तक नहीं हैं और इन्हें सरेआम मारा जा रहा है.हर बार माओवादियों का मुद्दा उठते ही आदिवासियों का सवाल सामने आता है और सता के गड़रिये...
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मुन्ना के पांडेय(कुणाल)
देश/आदिवासी/सरकार/नक्सली...
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[24 Apr 2010 07:09 AM]



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