'नाम..'
..."अजनबी मिले बेशुमार..सफ़र-ए-दरिया-ए-ज़िन्दगानी..चिरांगा हुए..रूह से रूबरू..बिखरी झोली में मसर्रत-ए-'प्रियंकाभिलाषी'..नज़राना-ए-अक़ीदत..सज़ा रखा है..आईने में..ए-हम-ज़लीस..देहलीज़-ए-कूचा..कसौटी-ए-शाम..नाक्शीन होगा..फ़क़त मेरा नाम..!"...*मसर्रत =...
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Priyankaabhilaashi
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[24 Apr 2010 06:50 AM]



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