मसला यह भी हल हो जायेगा।

कुछ इधर से  ,कुछ उधर  से ठोस भी कभी तरल हो जायेगा मसला यह भी हल हो जायेगा।फ़ागुन का रंग जो चढा कभीचैती बैरागी विकल हो जायेगा।सच एक था और रहेगा एक परअमृत तो कभी गरल हो जायेगा।पहले से जो तुमने की तैयारियांजीवन का पर्चा सरल हो जायेगा।पाकर संग फूलों का एक दिनकांटा भी कोमल हो जायेगा... [पूरी पोस्ट]
writer दीपक गर्ग

निर्मल वर्मा

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[24 Apr 2010 05:31 AM]

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