तोहरा से नज़र मिलाईं कईसे (भोजपुरी ग़ज़ल)
देखाईं कईसे जताईं कईसे हमरो अकिल बा बताईं कईसे नासमझ के समझाईं कईसे आँख खुलल बा जगाईं कईसे अकेले सफ़र में गाईं कईसे उदास मन बा खाईं कईसे घाव करेजा के छुपाईं कईसे पुरनका याद भुलाईं कईसे तोहरा से नज़र मिलाईं कईसे 'सुलभ' झूट शान देखाईं कईसे...
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सुलभ § सतरंगी
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[24 Apr 2010 05:16 AM]



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