तोहरा से नज़र मिलाईं कईसे (भोजपुरी ग़ज़ल)

यादों का इन्द्रजाल... Hindi Poetry by Sulabh देखाईं कईसे जताईं कईसे हमरो अकिल बा बताईं कईसे नासमझ के समझाईं कईसे आँख खुलल बा जगाईं कईसे अकेले सफ़र में गाईं कईसे उदास मन बा खाईं कईसे घाव करेजा के छुपाईं कईसे पुरनका याद भुलाईं कईसे तोहरा से नज़र मिलाईं कईसे 'सुलभ' झूट शान देखाईं कईसे... [पूरी पोस्ट]
writer सुलभ § सतरंगी
views
21
upvote
3
downvote
0
rating
3
comments
15
[24 Apr 2010 05:16 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix