गबन की राशि लौटाने को कोषाध्यक्ष के नाम खुला पत्र

स्वप्नलोक आदरणीय कोषाध्यक्ष जी ! आपकी तरक्की पर आपको बहुत-बहुत बधाई । यह अलग बात है कि यह बधाई मेरे हृदय की गहराई से नहीं निकल रही है । हृदय में तो प्रतिशोध की भावना ने उपनिवेश स्थापित कर लिया है ।  लेकिन फिर भी एक सभ्य नागरिक होने के नाते तरक्की पर बधाई... [पूरी पोस्ट]
writer विवेक सिंह
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[24 Apr 2010 03:36 AM]

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