कुछ कथाओं की अपूर्णता ही देती हैं तृप्ति ...

जीवन के पदचिन्ह कुछ कथाओं की अपूर्णता ही देती हैं तृप्ति ... कौन जाने अन्यथा जीवन-पूर्णता भी क्या मुक्ति?स्वयं तराशता परिधियाँ अपनी  कामनाओं की उकेरता अदृश्य-खंडित सीमायें भावनाओं की हैं तो असंख्य आकांक्षाएं सहज समाधान की किन्तु दृष्टव्य... [पूरी पोस्ट]
writer Sudhir (सुधीर)

चिंतन

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[24 Apr 2010 02:00 AM]

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