ये मुहब्बत की बारीकियाँ।

युग-विमर्श  (YUG -VIMARSH)   یگ ومرش ये मुहब्बत की बारीकियाँ।कुछ सिखा दें मुझे मेह्रबाँ॥साँस लेता है आतश-फ़िशाँ, राख हो जायेगा आस्माँ॥कुछ कमी सी है जज़बात में,दामने-दिल है क्यों बेनिशाँ॥कल था क्या आज क्या हो गया, सब हैं ये वक़्त की ख़ूबियाँ॥मग़रिबीयत की मय का नशा, देर-पा हो सका है कहाँ॥कैसे... [पूरी पोस्ट]
writer युग-विमर्श
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[24 Apr 2010 00:36 AM]

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