किनारा

जज़्बात, ज़िन्दगी और मै लग ना जाए किसी और किनारे से !बाँध ले तू किश्ती को इस किनारे से !!आया होगा तोड़कर कोई किनारा !आ टिका है इसलिए इस किनारे से !!पार होना है तो पानी में आ जाओ !क्यूँ चलता है डर डर के तू किनारे से !!था जो शहर बह गया वो सैलाब में !अब मिलेगा क्या तुझको इस किनारे... [पूरी पोस्ट]
writer Indranil Bhattacharjee ........."सैल"

kavita

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[01 Mar 2010 09:18 AM]

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