अब भी वक़्त है जनाब
अब भी वक़्त है जनाब, कुछ तो सुधर जाइये !अब तो छोडिये शराब, कुछ तो सुधर जाइये !!पैसे कमाते रहे पर रिश्ते खर्च हो गए !अब तो कीजिये हिसाब कुछ तो सुधर जाईये !!काफी उम्र हो गयी है अब तो पता चल गया !क्या भला है क्या ख़राब, कुछ तो सुधर जाईये !!शौक लगा रखे हैं इस...
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Indranil Bhattacharjee ........."सैल"
ghazal
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[01 Mar 2010 09:18 AM]



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