रुला गया मौसम ये हँसी का
ज़िन्दगी तू करले कितना भी सितम हंसके सारी बातें अब सहेंगे हम गैरों से कैसा गिला किसीसे भी क्या मिलामिला है तो बस केवल ही रंजो ग़म हंसके सारी बातें अब सहेंगे हम तरीका ना जाना मै ज़माने का नाम मुझको मिला दीवाने का करता रहा नादानी होशियारी ना जानीशौक था यूँ...
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Indranil Bhattacharjee ........."सैल"
kavita
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[13 Apr 2010 20:44 PM]



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