ये खबर गर्म है

जज़्बात, ज़िन्दगी और मै ये खबर पढ़ लो, ये खबर गर्म है !हादसों से अभी ये शहर गर्म है !!नादान सही पर इतनी तो है समझ!इस दिल में ठंडक है, ये नज़र गर्म है !!रह गए जमकर ये लम्हात वहीँ पर !तन्हाई की जो ये दोपहर गर्म है !!अभी से तो न मुझ पर लिखो मर्सिया !अभी तो रगों में ये ज़हर गर्म है... [पूरी पोस्ट]
writer Indranil Bhattacharjee ........."सैल"

ghazal

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[12 Mar 2010 21:40 PM]

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