काफिर हूँ, पर …..

जज़्बात, ज़िन्दगी और मै मैं एक बहता दरिया हूँ, ठहर नहीं सकता हूँ मैं !मैं हूँ शायर का एहसास, कि मर नहीं सकता हूँ मैं !!जलता रहता है आंधियों में भी जो वो चराग हूँ  !इन ज़रा सी हवाओं से अब डर नहीं सकता हूँ मैं !!मैं आया था जिन राहों को ज़िन्दगी में पीछे छोड़ !उन राहों से अब... [पूरी पोस्ट]
writer Indranil Bhattacharjee ........."सैल"

ghazal

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[09 Apr 2010 11:22 AM]

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