कैसे …

जज़्बात, ज़िन्दगी और मै आज के समाज में निरंतर निरर्थक होते जाते रिश्तों पर यह मतला पढ़िए ....बिखर चुके टूटकर जो, अब उनको जोड़े कैसे !निकल आए इतना आगे, राहों को मोड़े कैसे !!बचपन में साथ खेलने वाले भाईयों के बीच उठती दीवार पर ये शेर अर्ज़ है ....बंटवारा किस तरह होगा बचपन की यादों... [पूरी पोस्ट]
writer Indranil Bhattacharjee ........."सैल"

ghazal

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[17 Apr 2010 08:29 AM]

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