काम रखो बस काम से

जज़्बात, ज़िन्दगी और मै मेरे इस ग़ज़ल पर डॉ. डंडा लखनवी जी कुछ सुधार किये हैं ! इसके लिए मैं उनका आभारी हूँ ! उनके द्वारा बताये हुए संसोधन को मैं इसमें शामिल कर रहा हूँ ... मुझे यकीन है कि इससे इस ग़ज़ल में और निखार आ गया है .... सभी बड़ों एवं बुजुर्गों से निवेदन है कि जब भी मौका... [पूरी पोस्ट]
writer Indranil Bhattacharjee ........."सैल"

ghazal

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[23 Apr 2010 11:24 AM]

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