कौटिल्य का अर्थशास्त्र-भंवरा मरने के लिये ही हाथी के कान में ध्वनि करता है (hathi aur bhavra-kautilya darshan)
स्निग्धदीपशिखालोकविलेभितक्लिोचनः।मृत्युमृच्छत्य सन्देहात् पतंगः सहसा पतन्।।हिन्दी में भावार्थ-दीपक की स्निग्ध शिखा के दर्शन से जिस पतंगे के नेत्र ललचा जाते हैं और वह उसमें जलकर जान देता है। यह रूप का विषय है इसमें संदेह नहीं है। गन्धलुब्धो मधुकरो...
[पूरी पोस्ट]
दीपक भारतदीप
हिन्दू-धर्म
11
0
0
0
0
[23 Apr 2010 23:19 PM]



Shuffle







