एक दोस्त के लौटने पर- कविता- सुधीर सुमन

कारवाँ एक दोस्त के लौटने परसब वहां सिर्फ अवसर की तलाश में थेउसी का फलसफा गूंजता था चारों ओरतुम लेके गए थे मेहनत की पूंजीबराबरी का ख्वाबअभावों में पले स्वाभिमान की आंच।तुम्हें लगा होगा किशायद तुम्हारी जरूरत है वहांयार-दोस्तों के मश्वरे थेमदद भी थीफिर भी लौट आए... [पूरी पोस्ट]
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[23 Apr 2010 22:31 PM]

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